Magh Gupt Navratri 2026: द्विपुष्कर योग में की गई गुप्त नवरात्रि पूजा से मिलता है कई गुना पुण्य, आप भी उठाएं लाभ

Magh Gupt Navratri 2026: द्विपुष्कर योग में की गई गुप्त नवरात्रि पूजा से मिलता है कई गुना पुण्य, आप भी उठाएं लाभ

भारतीय सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व केवल एक तिथि मात्र नहीं होता, बल्कि वह चेतना, साधना और प्रकृति के गहरे संतुलन का प्रतीक होता है। इन्हीं विशिष्ट पर्वों में से एक है गुप्त नवरात्रि, जो बाहरीसे दूर रहकर आंतरिक साधना और आत्मिक शक्ति को जागृत करने का अवसर प्रदान करती है।

वर्ष 2026 में माघ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी से हो चुका है। इस वर्ष यह पर्व और भी विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान द्विपुष्कर योग का अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में की गई पूजा, मंत्र जाप और दान का फल सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

क्या है गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में जहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की सार्वजनिक रूप से आराधना की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि को ‘साधना और संयम का पर्व’ कहा गया है। इस दौरान दस महाविद्याओं काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से साधना की जाती है।

मान्यता है कि इस समय की गई साधना अत्यंत प्रभावशाली होती है और साधक को इच्छाओं को संकल्प में बदलने तथा दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति में सहायता करती है। गुप्त रूप से की गई पूजा का प्रभाव गहरा, स्थायी और व्यक्तिगत माना जाता है।