'चिंतन शिविर 3.0' से बदलेगा सुशासन का भविष्य: डिजिटल गवर्नेंस, एआई और कृषि सुधारों के दम पर विकसित छत्तीसगढ़ की नई रणनीति,मुख्यमंत्री साय बोले चिंतन नहीं, परिणाम देने वाला मंच है शिविर,ई-ऑफिस, हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे बड़े नवाचार पहले ही दे चुके हैं नई पहचान

'चिंतन शिविर 3.0' से बदलेगा सुशासन का भविष्य: डिजिटल गवर्नेंस, एआई और कृषि सुधारों के दम पर विकसित छत्तीसगढ़ की नई रणनीति,मुख्यमंत्री साय बोले चिंतन नहीं, परिणाम देने वाला मंच है शिविर,ई-ऑफिस, हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे बड़े नवाचार पहले ही दे चुके हैं नई पहचान

रायपुर। विकसित भारत-2047 के विजन को गति देने और छत्तीसगढ़ में सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित 'चिंतन शिविर 3.0' अब केवल राज्य स्तरीय प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि देश में तकनीक आधारित शासन और नीति-निर्माण का एक महत्वपूर्ण मॉडल बनकर उभर रहा है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में आयोजित इस दो दिवसीय मंत्रिमंडलीय चिंतन शिविर में शासन, प्रौद्योगिकी, कृषि, नेतृत्व विकास और प्रशासनिक सुधारों पर व्यापक मंथन किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर का उद्देश्य केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि उन्हें ठोस नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक सुधारों में बदलना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा को केंद्र में रखकर शासन व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विदित हो कि देशभर में जहां सरकारें सुशासन और डिजिटल प्रशासन को लेकर नए प्रयोग कर रही हैं, वहीं छत्तीसगढ़ का 'चिंतन शिविर 3.0' नीति-निर्माण को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर उतारने की पहल के रूप में सामने आया है। यदि इस शिविर में लिए गए निर्णय समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

डिजिटल गवर्नेंस बनेगा सुशासन की नई पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि चिंतन शिविर 3.0 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन जैसे भविष्य के विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि उभरती तकनीकों के माध्यम से प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार और रोजगार सृजन की नई संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

कृषि सुधारों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती

शिविर में आयोजित "कृषि से समृद्धि" सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। विशेषज्ञों ने किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों को साझा किया।

नेतृत्व विकास और संवेदनशील प्रशासन पर विशेष जोर

प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, सेवा-भाव, नैतिक मूल्यों और भावनात्मक संतुलन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रभावी सुशासन का आधार संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को समाज के प्रति उत्तरदायित्व और सकारात्मक नेतृत्व की भूमिका पर भी प्रेरित किया।

पहले दो चिंतन शिविरों के परिणाम बने राष्ट्रीय उदाहरण

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि पिछले चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर राज्य में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहलें लागू की गईं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे आम नागरिकों को तेज, पारदर्शी और सरल सेवाएं मिल रही हैं।

सुशासन का नया रोडमैप तैयार करेगा चिंतन शिविर 3.0

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस शिविर से प्राप्त सुझाव प्रशासनिक सुधार, डिजिटल परिवर्तन, विभागीय समन्वय, कृषि विकास और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार नवाचार, ज्ञान, आधुनिक तकनीक और दूरदर्शी नीति-निर्माण के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।