"सोशल मीडिया पर बेबुनियाद आरोप लोकतंत्र नहीं, चरित्रहनन का हथियार; बगिया सीएम हाउस को बदनाम करने की साजिश पर कार्रवाई की मांग"
जशपुर । सोशल मीडिया पर बिना तथ्य और प्रमाण के लगाए जा रहे आरोपों को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। जिला भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं पूर्व महामंत्री शंकर गुप्ता ने बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय (सीएम हाउस) और उससे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ प्रसारित कथित भ्रामक पोस्टों की कड़ी निंदा करते हुए इसे सुनियोजित तरीके से छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति, संस्था या सार्वजनिक कार्यालय के खिलाफ बिना साक्ष्य सोशल मीडिया पर आरोप लगाना न केवल गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि इससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और लोगों की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ किसी की छवि खराब करने का अधिकार नहीं है।
शंकर गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बगिया सीएम हाउस क्षेत्र की जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। ऐसे समय में कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर बिना किसी ठोस प्रमाण के सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
उन्होंने बताया कि अमित पांडेय नामक फेसबुक आईडी से साझा की गई एक पोस्ट में बगिया सीएम हाउस के प्रभारी आकाश गुप्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, इसलिए इस तरह के आरोपों का सोशल मीडिया पर प्रसार उचित नहीं माना जा सकता।
भाजपा नेता ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी भी प्रकार की शिकायत या ठोस साक्ष्य हैं तो उसके लिए शासन-प्रशासन और कानून के तहत शिकायत दर्ज कराने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। तथ्यों के बजाय सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत टिप्पणियां करना लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी स्वार्थ, सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने और राजनीतिक या व्यक्तिगत द्वेष के कारण भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं, जिससे जनमानस को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
शंकर गुप्ता ने शासन-प्रशासन से मांग की कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर बिना प्रमाण किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया लोकतांत्रिक संवाद का सशक्त माध्यम है, लेकिन इसका उपयोग तथ्य, जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ होना चाहिए। बेबुनियाद आरोपों और दुष्प्रचार पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

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