बड़ी खबर - साय सरकार का बड़ा निर्देश : ‘प्रॉक्सी’ व्यवस्था पर शिकंजा,अब महिला जनप्रतिनिधियों की जगह पति-रिश्तेदारों ने काम किया तो होगी कार्रवाई,अधिकारियों की भूमिका होगी अहम, महिला प्रतिनिधियों को मिलेगा निर्णय का वास्तविक अधिकार

बड़ी खबर - साय सरकार का बड़ा निर्देश : ‘प्रॉक्सी’ व्यवस्था पर शिकंजा,अब महिला जनप्रतिनिधियों की जगह पति-रिश्तेदारों ने काम किया तो होगी कार्रवाई,अधिकारियों की भूमिका होगी अहम, महिला प्रतिनिधियों को मिलेगा निर्णय का वास्तविक अधिकार

रायपुर। महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर पति या अन्य रिश्तेदारों द्वारा सरकारी कामकाज संचालित किए जाने वाली कथित ‘प्रॉक्सी’ व्यवस्था पर विष्णुदेव साय सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए सख्ती के संकेत दिए हैं। पंचायतों में पहले से लागू व्यवस्था के बाद अब नगर निगम और नगर पालिकाओं में भी महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति अथवा अन्य रिश्तेदारों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल महिला जनप्रतिनिधियों को पद दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें अपने पद से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करने का अवसर देना है। महिला पार्षद, अध्यक्ष अथवा अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि की जगह उनके पति, पुत्र, भाई या अन्य रिश्तेदार आधिकारिक रूप से कामकाज न संभालें, यह सुनिश्चित करना अब स्थानीय प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

अब अधिकारियों की भूमिका सबसे अहम

इस व्यवस्था को जमीन पर लागू कराने में जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन विभाग, नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारियों की भूमिका निर्णायक होगी। बैठकों, सरकारी पत्राचार, निरीक्षण, अधिकारियों से आधिकारिक संवाद और विकास कार्यों की समीक्षा में निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की स्वयं उपस्थिति और भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

यदि किसी महिला जनप्रतिनिधि की जगह लगातार कोई रिश्तेदार सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करता है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी निगरानी कर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

महिला सशक्तिकरण को मिलेगा नया आधार

साय सरकार की इस पहल को स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि महिला आरक्षण के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं निर्णय लें, जनता की समस्याएं सुनें और विकास कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

अब चुनौती आदेश जारी करने से ज्यादा उसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। यदि अधिकारी मैदानी स्तर पर इसकी नियमित निगरानी करते हैं और नियमों का उल्लंघन होने पर समय पर कार्रवाई करते हैं, तो पंचायतों से लेकर नगरीय निकायों तक ‘प्रॉक्सी राजनीति’ पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।