छत्तीसगढ़ संवाद में प्रतिनियुक्ति पर उठे सवाल, नियमों की कसौटी पर कितनी खरी है व्यवस्था? ,,,,,,,,,अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति पर जिम्मेदार विभाग से सीधा सवाल—किस नियम, किस स्वीकृत पद और किस सक्षम आदेश के तहत लिया जा रहा है कार्य?

छत्तीसगढ़ संवाद में प्रतिनियुक्ति पर उठे सवाल, नियमों की कसौटी पर कितनी खरी है व्यवस्था? ,,,,,,,,,अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति पर जिम्मेदार विभाग से सीधा सवाल—किस नियम, किस स्वीकृत पद और किस सक्षम आदेश के तहत लिया जा रहा है कार्य?

रायपुर। शासन की योजनाओं और नीतियों के प्रचार-प्रसार से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान छत्तीसगढ़ संवाद में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर अब पारदर्शिता और नियमों के पालन का सवाल उठ रहा है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार छत्तीसगढ़ संवाद जनसंपर्क विभाग की सहयोगी संस्था है और विज्ञापन, मीडिया कम्युनिकेशन तथा प्रकाशन जैसे कार्यों से जुड़ी है।
ऐसे संस्थान में पदस्थापना और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता स्वाभाविक रूप से गंभीर विषय बन जाती है। सवाल किसी व्यक्ति विशेष की कार्यक्षमता या नीयत पर नहीं,बल्कि पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता और पारदर्शिता पर है।


आखिर किस नियम के तहत हो रही है प्रतिनियुक्ति?
सरकारी सेवा में प्रतिनियुक्ति एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर शासन के नियम, परिपत्र तथा प्रतिनियुक्ति से संबंधित निर्देश उपलब्ध हैं।
ऐसे में जिम्मेदार विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ संवाद में वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी के मामले में—
1. संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के मूल विभाग का नाम क्या है?
2. उन्हें छत्तीसगढ़ संवाद में किस पद पर कार्य करने के लिए भेजा गया है?
3. वह पद शासन द्वारा स्वीकृत पद है या नहीं?
4. प्रतिनियुक्ति का आदेश किस सक्षम प्राधिकारी ने जारी किया?
5. मूल विभाग और छत्तीसगढ़ संवाद के बीच आवश्यक सहमति/अनुमोदन लिया गया है या नहीं?
6. प्रतिनियुक्ति की निर्धारित अवधि कितनी है?
7. अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि कार्य लिया जा रहा है तो उसका वैधानिक आधार क्या है?
8. संबंधित पद के लिए छत्तीसगढ़ संवाद/जनसंपर्क विभाग के नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति क्या है?
इन सवालों का जवाब सामान्य बयान से नहीं, बल्कि आदेश और नियमों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

शासन के अपने नियमों में प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था,फिर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी एक शासन परिपत्र में शासकीय सेवक की सेवाओं को अन्य विभाग/संस्था में प्रतिनियुक्ति अथवा डिप्लॉयमेंट पर सौंपने की व्यवस्था का उल्लेख है और संबंधित विभागों की सहमति की शर्त भी रखी गई है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ संवाद में लागू व्यवस्था को लेकर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वर्तमान पदस्थापन इन्हीं लागू प्रावधानों के अंतर्गत किए गए हैं या किसी अन्य विशेष आदेश/नियम के आधार पर। यदि विशेष प्रावधान है तो वह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


सवाल नियुक्ति पर नहीं, प्रक्रिया पर है

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी की योग्यता अथवा व्यक्तिगत भूमिका पर प्रश्न खड़ा करना उद्देश्य नहीं है। सवाल केवल इतना है कि सरकारी संस्था में कार्य लेने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है या नहीं।
यदि प्रत्येक प्रतिनियुक्ति के पीछे सक्षम आदेश, स्वीकृत पद और निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है तो विवाद की कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।
लेकिन यदि दस्तावेजों में कुछ और स्थिति सामने आती है,तो शासन को उस पर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

जनसंपर्क विभाग से सीधा जवाब क्यों नहीं?

छत्तीसगढ़ संवाद सीधे तौर पर जनसंपर्क विभाग से जुड़ी संस्था है। इसलिए इस मामले में जिम्मेदारी से बचने के बजाय जनसंपर्क विभाग को स्वयं स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विभाग यह बताए कि—
1. छत्तीसगढ़ संवाद में कुल कितने अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर हैं?
2. कितने नियमित कर्मचारी हैं?
3. प्रतिनियुक्त कर्मचारियों के मूल विभाग कौन-कौन से हैं?
4. किस पद पर कितने समय से प्रतिनियुक्ति है?
5. और प्रत्येक प्रतिनियुक्ति के लिए कौन-सा शासन आदेश लागू है?
यह जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

नियम सही हैं तो कागज सामने रखने में परेशानी कैसी?

यहां सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता का है। यदि प्रतिनियुक्तियां पूरी तरह नियमसम्मत हैं तो संबंधित आदेशों और स्वीकृत पदों की जानकारी सामने रखने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।नियमों के पालन का दावा तभी मजबूत माना जाएगा, जब उसके समर्थन में दस्तावेज भी उपलब्ध हों।
सरकारी संस्थानों में मौखिक स्पष्टीकरण से ज्यादा महत्व लिखित आदेश और लागू नियमों का होता है।

अब जांच नहीं तो कम से कम तथ्य सार्वजनिक किए जाएं

मामले में किसी पूर्वाग्रह के बजाय शासन को तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। छत्तीसगढ़ संवाद में वर्तमान में प्रतिनियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची तथा उनके प्रतिनियुक्ति आदेशों की विभागीय स्तर पर समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सभी पदस्थापनाएं स्वीकृत पदों और लागू नियमों के अनुरूप हैं। यदि सब कुछ नियम के अनुसार है तो विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यदि किसी मामले में नियम, स्वीकृत पद अथवा सक्षम स्वीकृति को लेकर विसंगति सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सवाल सीधा है
छत्तीसगढ़ संवाद में प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों-कर्मचारियों से कार्य लिया जा रहा है तो किस नियम के तहत?
इस एक सवाल का जवाब ही पूरे मामले की दिशा स्पष्ट कर सकता है। जनता को नियमों की व्याख्या नहीं, तथ्य, आदेश और जवाबदेही चाहिए। छत्तीसगढ़ संवाद जैसे शासकीय कार्यों से जुड़े संस्थान में पदस्थापना की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिस पर सवाल उठने की गुंजाइश ही न रहे।
इसलिए जिम्मेदार विभाग से अपेक्षा है कि वह प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या, मूल विभाग,पद,प्रतिनियुक्ति अवधि और सक्षम आदेश की स्थिति स्पष्ट करते हुए सार्वजनिक जवाब दे।
क्योंकि सवाल किसी व्यक्ति का नहीं है—सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था में नियम सर्वोपरि हैं या नहीं।