कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में बही विकास की धार : मुख्यमंत्री साय के कार्यों से जागी विश्वास की उम्मीद,अपने विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास की दिशा में बढ़ते कदम

कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में बही विकास की धार : मुख्यमंत्री साय के कार्यों से जागी विश्वास की उम्मीद,अपने विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास की दिशा में बढ़ते कदम

विशेष संपादकीय (श्रीमती अमृता सहाय संपादक)

किसी क्षेत्र के विकास की वास्तविक तस्वीर केवल बड़ी-बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि उन घोषणाओं के जमीन पर उतरने से बनती है। जब सड़क गांव तक पहुंचती है, जब बैंकिंग सुविधा घर के नजदीक मिलती है, जब किसान को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जब बच्चों के लिए आधुनिक विद्यालय भवन तैयार होते हैं और जब शहरों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होता है, तब विकास का अर्थ लोगों के दैनिक जीवन में दिखाई देने लगता है।

जशपुर जिले की कुनकुरी विधानसभा में हाल के दिनों में सामने आए विकास कार्यों और स्वीकृतियों को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। जिले की प्रशासनिक जानकारी के अनुसार कुनकुरी विकासखंड में 51 ग्राम पंचायतें और 90 राजस्व गांव हैं, जबकि फरसाबहार और कांसाबेल जैसे क्षेत्र भी जिले के विकास परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

कुनकुरी शहर में विकास की नई तस्वीर

कुनकुरी नगर में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 1 करोड़ 1 लाख 64 हजार रुपये के दो महत्वपूर्ण विकास कार्यों को अंतिम स्वीकृति मिलना नगरीय विकास की दिशा में उल्लेखनीय कदम है।

वार्ड क्रमांक 06 स्थित हनुमान टेकड़ी के पास 76.81 लाख रुपये की लागत से सूर्य नमस्कार चौक का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही इसी क्षेत्र में 24.83 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाएगा।

इन दोनों कार्यों को केवल निर्माण कार्य के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। सूर्य नमस्कार चौक जैसे सार्वजनिक स्थल शहर की पहचान और नागरिक जीवन को नया स्वरूप दे सकते हैं, वहीं सामुदायिक भवन सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोषणा के बाद स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यानी विकास की मांग को प्रशासनिक प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हुआ है।

शिक्षा के मोर्चे पर बदलता परिदृश्य

विकास का सबसे टिकाऊ आधार शिक्षा है। इसी दृष्टि से फरसाबहार और कांसाबेल के ढूढरूडांड में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के नए भवनों का निर्माण महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

दिए गए विवरण के अनुसार इन दोनों विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है और निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच रहा है। सरकारी जिला पोर्टल पर भी ढूढरूडांड एकलव्य विद्यालय में वर्ष 2026-27 के लिए शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक व्यवस्थाओं तथा सामग्री आपूर्ति से संबंधित गतिविधियां दर्ज हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि विद्यालय परिसर के संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

कांसाबेल क्षेत्र में बटाईकेला से नए भवन में विद्यालय संचालन की तैयारी का अर्थ है कि आदिवासी विद्यार्थियों को शिक्षा, छात्रावास, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और खेल जैसी सुविधाओं से युक्त बेहतर परिसर मिलने की संभावना मजबूत हुई है।

दरअसल, किसी आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक आवासीय विद्यालय केवल एक भवन नहीं होता। वह बच्चों के लिए अवसरों का विस्तार होता है। यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा गांव और कस्बे के करीब उपलब्ध होती है तो उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

सड़क ने बदली गांव की राह

ग्रामीण विकास की सबसे पहली आवश्यकता संपर्क है। फरसाबहार क्षेत्र में बोखी से झारपारा बस्ती होते हुए सहसपुर मार्ग तक लगभग 1 करोड़ 9 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण पूरा होना इसी आवश्यकता को पूरा करता है।

वर्षों से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह केवल पक्की सड़क का निर्माण नहीं, बल्कि आवागमन की एक पुरानी बाधा का समाधान है।

सड़क बनने के बाद ग्रामीणों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े स्थानों तक पहुंच आसान होती है। विशेष रूप से बरसात के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का महत्व और बढ़ जाता है।

विकास की बड़ी योजनाओं के बीच ऐसे छोटे दिखने वाले लेकिन प्रत्यक्ष प्रभाव वाले कार्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसी गांव के लिए सड़क ही उसकी विकास यात्रा का पहला रास्ता बनती है।

पंडरीपानी में बैंक पहुंचा तो 60 गांवों तक पहुंची आर्थिक सुविधा

फरसाबहार के पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक की नई शाखा का शुभारंभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नई शाखा से आसपास के लगभग 60 गांवों के लोगों को बैंकिंग सुविधा मिलने लगी है।

यह बदलाव सामान्य बैंक शाखा खुलने से कहीं अधिक व्यापक अर्थ रखता है।

किसानों के खाते, मजदूरों की बचत, महिलाओं की वित्तीय गतिविधियां, पेंशनधारियों की सुविधा, व्यापारियों के लेन-देन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी बैंकिंग सेवाएं—इन सभी के लिए स्थानीय स्तर पर बैंक उपलब्ध होना ग्रामीण जीवन को सीधे प्रभावित करता है।

पहले बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के समय और यात्रा खर्च में कमी आना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकता है।

सीमावर्ती किसानों के लिए खरीदी केंद्र की सुविधा

ओडिशा सीमा से लगे फरसाबहार के कोरंगामाल में नवीन धान खरीदी केंद्र की स्वीकृति भी किसानों की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय है।

लंबी दूरी तय करके धान बेचने की मजबूरी किसानों के लिए समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ाती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर खरीदी केंद्र की सुविधा कृषि उपज के विपणन को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में कदम है।

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कोरंगामाल के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए आभार जताया तथा खरीदी केंद्र के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।

सीमावर्ती गांवों में ऐसी सुविधाओं का महत्व और अधिक है, क्योंकि यहां बेहतर प्रशासनिक एवं आर्थिक पहुंच ग्रामीणों के विश्वास और क्षेत्रीय विकास दोनों से जुड़ती है।

CSR के माध्यम से जिले के विकास को अतिरिक्त आधार

जशपुर जिले के विकास के लिए CSR निधि से 61 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी भी विकास के व्यापक परिदृश्य में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जा रहा है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी बजट के साथ CSR जैसी अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को गति दे सकता है। यदि ऐसी निधि का उपयोग पारदर्शिता, प्राथमिकता और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से हो तो इसका लाभ लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।

घोषणाओं से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की कसौटी

कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में सामने आए इन कार्यों को एक साथ देखने पर विकास का एक व्यापक खाका दिखाई देता है,

शहर में अधोसंरचना, गांव में सड़क, किसानों के लिए खरीदी सुविधा, ग्रामीणों के लिए बैंकिंग पहुंच, विद्यार्थियों के लिए आधुनिक विद्यालय और जिले के लिए CSR आधारित अतिरिक्त संसाधन।

यही वह बिंदु है जहां किसी भी जनप्रतिनिधि या सरकार के कार्यों का वास्तविक मूल्यांकन होना चाहिए। घोषणा महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी स्वीकृति, निर्माण, पूर्णता और नागरिकों को मिलने वाला वास्तविक लाभ उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अपने गृह क्षेत्र कुनकुरी से जुड़ाव इन विकास कार्यों को राजनीतिक चर्चा से आगे बढ़ाकर क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में देखने का अवसर देता है। हालांकि किसी भी विकास कार्य की अंतिम सफलता उसकी घोषणा में नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, समयबद्ध पूर्णता और नागरिकों तक वास्तविक लाभ पहुंचने में तय होती है।

विश्वास की उम्मीद अब परिणामों से मजबूत होगी

कुनकुरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से जिन सुविधाओं की मांग होती रही है, उनमें सड़क, बैंक, शिक्षा, कृषि और सार्वजनिक अधोसंरचना प्रमुख हैं। हालिया स्वीकृतियां और निर्माणाधीन परियोजनाएं इन क्षेत्रों को संबोधित करती दिखाई देती हैं।

इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। इन कदमों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध परिणाम आने पर जनता के बीच विकास को लेकर बनी उम्मीद और मजबूत हो सकती है।

कुनकुरी विधानसभा की विकास यात्रा का अगला चरण अब केवल नई घोषणाओं का नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण, समय पर पूर्णता, पारदर्शी क्रियान्वयन और आम नागरिक तक लाभ पहुंचाने का होना चाहिए।

क्योंकि अंततः किसी भी क्षेत्र के विकास की सबसे बड़ी पहचान उसके भवन, सड़क या योजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि यह होती है कि वहां रहने वाले आम आदमी के जीवन में कितना वास्तविक बदलाव आया।

कुनकुरी की तस्वीर में दिखाई दे रहे ये बदलाव इसी व्यापक विकास यात्रा की ओर संकेत करते हैं,जहां उम्मीद अब केवल घोषणा तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों में बदलने की प्रतीक्षा कर रही है।