'जी राम जी' योजना पर छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम: भाजपा ने बताया विकास का नया अध्याय, कांग्रेस ने मनरेगा और वित्तीय हिस्सेदारी पर उठाए सवाल

'जी राम जी' योजना पर छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम: भाजपा ने बताया विकास का नया अध्याय, कांग्रेस ने मनरेगा और वित्तीय हिस्सेदारी पर उठाए सवाल

रायपुर । छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से लागू हुई 'विकसित भारत जी राम जी' योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने इसे प्रदेश के विकास, रोजगार और जनकल्याण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है, वहीं कांग्रेस ने योजना के साथ लागू नई व्यवस्था और मनरेगा को लेकर कई सवाल उठाते हुए श्रमिकों के हित में जुलाई से ही मनरेगा कार्य शुरू करने की मांग की है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि 'विकसित भारत: जी राम जी' योजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उनके अनुसार, इस योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा जनकल्याणकारी सुविधाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह योजना छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति देगी और प्रदेश की खुशहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं से योजना की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

वहीं, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने मनरेगा की नई वित्तीय व्यवस्था और राज्यों की हिस्सेदारी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए मनरेगा के कार्य जुलाई माह से ही शुरू किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि समय पर काम शुरू होने से बारिश के मौसम में भी श्रमिकों को रोजगार मिलता रहेगा। कांग्रेस ने यह भी कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि राज्यों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और योजना का प्रभावी संचालन हो सके।

इस तरह 'जी राम जी' योजना और मनरेगा को लेकर प्रदेश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। भाजपा जहां इसे विकास, रोजगार और जनकल्याण का नया अध्याय बता रही है, वहीं कांग्रेस मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन, श्रमिकों को समय पर रोजगार तथा वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल इसे ग्रामीण विकास और जनहित से जुड़े अहम विषय के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं।