आईएएस बनने की राह पर निकले युवा अफसर,जशपुर की वादियों में सीखे ‘हिमालयी खेती’ के गुर : CGPSC के 7 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टरों ने देखा कैसे छत्तीसगढ़ का जशपुर बन रहा ‘मिनी हिमाचल’, सेव-नाशपाती की खेती ने किया अभिभूत

आईएएस बनने की राह पर निकले युवा अफसर,जशपुर की वादियों में सीखे ‘हिमालयी खेती’ के गुर : CGPSC के 7 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टरों ने देखा कैसे छत्तीसगढ़ का जशपुर बन रहा ‘मिनी हिमाचल’, सेव-नाशपाती की खेती ने किया अभिभूत

जशपुर । देश में प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए यह एक प्रेरणादायक तस्वीर है कि भविष्य के प्रशासनिक अधिकारी अब केवल फाइलों और कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गांव, खेत, किसान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को समझकर प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाएंगे।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से चयनित सात नव-नियुक्त डिप्टी कलेक्टरों ने मैदानी प्रशिक्षण के तहत जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड का दौरा किया। छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा अधिकारियों को जमीनी प्रशासन, ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।

जशपुर बना ‘मिनी हिमाचल’

मनोरा क्षेत्र पहुंचे युवा अधिकारियों ने सेव (एप्पल) और नाशपाती की बागवानी का अवलोकन किया। पहाड़ी जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण जशपुर का यह इलाका अब छत्तीसगढ़ के ‘मिनी हिमाचल’ के रूप में पहचान बना रहा है।

प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने स्थानीय किसानों, उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों और बागवानों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जाना कि किस प्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद किसान उच्च मूल्य वाली फसलों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं।

खेतों से सीखा प्रशासन का पाठ

अधिकारियों ने महसूस किया कि प्रशासनिक योजनाओं की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन केवल कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों, गांवों और किसानों के बीच जाकर ही किया जा सकता है। यह भ्रमण उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जलवायु आधारित खेती और स्थानीय रोजगार के नए मॉडल को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है।

आत्मनिर्भर भारत की नई तस्वीर

जशपुर की सेव और नाशपाती की खेती आज यह संदेश दे रही है कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती को बढ़ावा मिले तो आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्र भी देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। युवा अधिकारियों के लिए यह अनुभव भविष्य में नीति निर्माण और बेहतर प्रशासनिक निर्णयों में सहायक साबित होगा।

ये अधिकारी रहे शामिल

प्रशिक्षण दल में रविशंकर वर्मा, सुश्री निधि प्रधान, सुश्री नंदनी साहू, मनीष बघेल, सौरभ दीवान, लखेश्वर यादव एवं सत्येन्द्र कुमार बंजारे शामिल रहे।जशपुर की वादियों में किसानों के बीच बिताया गया यह समय इन युवा अधिकारियों के लिए केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच संबंधों को समझने की एक महत्वपूर्ण पाठशाला साबित हुआ।