आपातकाल के मुद्दे पर दीपक बैज का बड़ा हमला, बोले- देश में 12 वर्षों से अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति

आपातकाल के मुद्दे पर दीपक बैज का बड़ा हमला, बोले- देश में 12 वर्षों से अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति

रायपुर । आपातकाल की बरसी पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र की नीतियों और वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत लागू किया गया था और वह एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था, जबकि वर्तमान समय में देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव की स्थिति अधिक चिंताजनक है।

दीपक बैज ने कहा कि उस समय देश में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा की गई थी और बाद में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसे समाप्त भी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा आपातकाल को लेकर लगातार राजनीतिक अभियान चलाया जाता है,जबकि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हुई है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देश में चिंताएं बढ़ी हैं। साथ ही विपक्षी दलों की भूमिका को सीमित करने तथा केंद्रीय एजेंसियों के उपयोग को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।

दीपक बैज ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक की घटनाएं, आर्थिक असमानता और आम जनता की मूलभूत समस्याएं गंभीर मुद्दे हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़ी आबादी आज भी सरकारी खाद्यान्न योजनाओं पर निर्भर है और रोजगार के अवसरों की कमी से लोग परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए। किसान, युवा और अन्य वर्गों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध की आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों के उपयोग में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए।