सड़कों पर ‘लोहे के पहियों’ पर ब्रेक : रायगढ़ प्रशासन की अनोखी पहल, हादसों और सड़क क्षति रोकने की बड़ी कवायद
रायगढ़। सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर रायगढ़ जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और व्यवहारिक पहल शुरू की है। खेतों में उपयोग होने वाले लोहे के रिंग अथवा दोहरे पिंजरे लगे ट्रैक्टरों के सार्वजनिक सड़कों पर संचालन पर अब सख्ती बरती जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों को भी नुकसान से बचाएगा।
जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग के निर्देश पर अब ऐसे ट्रैक्टर यदि सड़क, सीमेंट रोड या राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ चालान, वाहन जब्ती और मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिले में विशेष जांच अभियान भी चलाया जाएगा।
खेत के लिए बने, सड़क के लिए नहीं
कृषि कार्यों के दौरान दलदली या फिसलन भरे खेतों में बेहतर पकड़ के लिए ट्रैक्टरों में लोहे के रिंग या दोहरे पिंजरे लगाए जाते हैं। लेकिन यही पहिए जब सड़कों पर चलते हैं तो डामर और सीमेंट सड़कों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही सड़क पर चलने वाले अन्य वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पहियों से सड़क की ऊपरी परत तेजी से खराब होती है, जिससे मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च बढ़ता है और आम लोगों को खराब सड़कों की परेशानी झेलनी पड़ती है।
सड़क सुरक्षा को मिली नई दिशा
रायगढ़ प्रशासन की यह पहल केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों और ट्रैक्टर मालिकों से अपील की गई है कि कृषि कार्य समाप्त होने के बाद लोहे के रिंग और दोहरे पिंजरे हटाकर ही ट्रैक्टरों का सड़क पर संचालन करें।
प्रशासन का मानना है कि यदि किसान स्वयं इस नियम का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक संपत्ति की भी सुरक्षा होगी।
उड़नदस्ता दल रखेगा नजर
जिले के विभिन्न मार्गों पर उड़नदस्ता दल नियमित जांच करेगा। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने वाले वाहनों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
जनहित में एक प्रभावी पहल
सड़कों को नुकसान से बचाना, दुर्घटनाओं की आशंका कम करना और किसानों को सुरक्षित परिवहन के प्रति जागरूक करना—इन तीनों उद्देश्यों को लेकर शुरू की गई यह पहल जिले में सड़क सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। शासन प्रशासन का संदेश स्पष्ट है खेत में लोहे के पहिए, सड़क पर केवल रबर टायर।
सड़क सुरक्षा और सड़कों की गुणवत्ता के लिए राज्यव्यापी मॉडल बन सकती है पहल
रायगढ़ प्रशासन द्वारा लोहे के रिंग अथवा दोहरे पिंजरे लगे ट्रैक्टरों के सार्वजनिक सड़कों पर संचालन पर की जा रही सख्ती को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा सकता है। प्रदेश के अनेक जिलों में किसान धान रोपाई और कृषि कार्यों के दौरान ट्रैक्टरों में लोहे के रिंग लगाते हैं, लेकिन कार्य समाप्त होने के बाद भी इन्हीं ट्रैक्टरों का उपयोग सड़कों पर किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे ग्रामीण सड़कों, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, सीमेंट रोड और राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान पहुंचता है। साथ ही दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।रायगढ़ की यह पहल सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर सकती है, जिसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है।
यदि परिवहन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से राज्यव्यापी अभियान चलाएं तो
सड़कों की आयु बढ़ेगी, सड़क मरम्मत पर होने वाला खर्च कम होगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी, किसानों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी

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