महिला आयोग की सख्ती से कई परिवारों को मिली राहत, 6 साल से शोषण की शिकार महिला का होगा विवाह,जशपुर में राज्य महिला आयोग की सुनवाई में भरण-पोषण, विवाह और पारिवारिक विवादों पर महत्वपूर्ण निर्णय

महिला आयोग की सख्ती से कई परिवारों को मिली राहत, 6 साल से शोषण की शिकार महिला का होगा विवाह,जशपुर में राज्य महिला आयोग की सुनवाई में भरण-पोषण, विवाह और पारिवारिक विवादों पर महत्वपूर्ण निर्णय

जशपुर, 22 जून 2026। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में जशपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में महिला उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण और सामाजिक न्याय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों का निराकरण किया गया। प्रदेश स्तर पर आयोग ने कुल 401 प्रकरणों की सुनवाई की, जबकि जशपुर जिले के 10 मामलों पर विशेष सुनवाई हुई।

महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव भी सुनवाई में मौजूद रहीं। कई मामलों में आयोग की समझाइश से परिवारों में सहमति बनी, वहीं कुछ मामलों में सख्त निर्देश भी जारी किए गए।

छह वर्ष तक साथ रहने के बाद विवाह को तैयार हुआ सैनिक

सुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण मामला उस महिला का रहा, जिसने आरोप लगाया कि एक सेना में पदस्थ जवान पिछले छह वर्षों से उसके साथ रह रहा था और दोनों की एक लगभग छह वर्षीय बच्ची भी है, लेकिन उसने अब तक विवाह नहीं किया। महिला ने आयोग के समक्ष विवाह कराने की मांग रखी।

आयोग के समक्ष जवान ने संबंध और बच्ची को स्वीकार करते हुए विवाह के लिए सहमति दी। वर्तमान में वह बिहार रेजीमेंट में ग्वालियर स्थित मोरार कैंप में पदस्थ है।

महिला आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, संरक्षण अधिकारी तथा सीडीपीओ को निर्देशित किया कि दोनों पक्षों की सहमति से विधिवत विवाह की प्रक्रिया प्रारंभ कराई जाए तथा दो माह के भीतर इसकी रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए। साथ ही जवान को हर माह 10 हजार रुपये भरण-पोषण राशि महिला के खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश की अवहेलना होने पर संबंधित सैन्य इकाई को पत्र भेजा जाएगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा भी की जाएगी।

सीआरपीएफ जवान देगा पत्नी और बच्चों को 20 हजार रुपये

एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में सीआरपीएफ में पदस्थ आरक्षक पर पत्नी और बच्चों की उपेक्षा करने का आरोप सामने आया। महिला ने बताया कि पति पिछले डेढ़ वर्ष से अलग रह रहा है और मात्र सात हजार रुपये खर्च देता था।

आयोग के समक्ष जवान ने पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये देने पर सहमति व्यक्त की। आयोग ने निर्देश दिया कि राशि प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में जमा की जाए।

महिला एवं बाल विकास विभाग की संरक्षण अधिकारी को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन नहीं होने पर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

जमीन विवाद में सीमांकन कराने के निर्देश

एक मामले में महिला ने आरोप लगाया कि उसकी पैतृक भूमि पर कब्जा कर फसल काटी जा रही है। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने तहसीलदार के माध्यम से भूमि का सीमांकन कराने और वास्तविक कब्जा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

स्टाफ नर्स को मिलेगा एचआरए, मकान की होगी मरम्मत

फरसाबहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक स्टाफ नर्स ने सरकारी आवास आवंटन में भेदभाव और जर्जर मकान दिए जाने की शिकायत की। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मकान की शीघ्र मरम्मत कराने तथा मरम्मत अवधि में नियमानुसार एचआरए देने के निर्देश दिए।

छोटे विवादों में समझाइश, न्यायालयीन मामलों में हस्तक्षेप नहीं

एक मामले में स्टाफ नर्स और डॉक्टर के बीच कार्यस्थल पर हुए विवाद को आयोग ने सामान्य मतभेद मानते हुए नस्तीबद्ध कर दिया। वहीं न्यायालय में लंबित एक प्रकरण में आयोग ने सुनवाई का औचित्य समाप्त मानते हुए मामला बंद कर दिया।

महिला आयोग की सक्रियता से बढ़ा भरोसा

जशपुर की सुनवाई में कई मामलों में समझौता और सहमति से समाधान सामने आया। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, भरण-पोषण की व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

आयोग के प्रमुख फैसले एक नजर में

■ छह साल से साथ रह रही महिला और सेना के जवान का कराया जाएगा विवाह।

■ जवान को महिला और बच्ची के लिए 10 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण देना होगा।

■ सीआरपीएफ जवान पत्नी और बच्चों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह देगा।

■ स्टाफ नर्स को मकान मरम्मत तक एचआरए मिलेगा।

■ भूमि विवाद में सीमांकन कर कब्जा सुनिश्चित करने के निर्देश।

■ संरक्षण अधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी।