राजनीति : राहुल की क्लास के बाद एक्शन मोड में कांग्रेस : जनता के बीच जाने का फरमान,बूथ से बनेगी ताकत,आंदोलन से बनेगा माहौल,कांग्रेस का मिशन बूथ से सत्ता तक नई रणनीति पर फोकस
जिला अध्यक्षों को मिला जमीनी संघर्ष का मंत्र,जनआंदोलन और संगठन विस्तार पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में लंबे समय बाद संगठनात्मक स्तर पर बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। प्रदेश में पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने और आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं। राहुल गांधी के मार्गदर्शन में हुए प्रशिक्षण शिविर और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों के बाद संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
पार्टी नेतृत्व ने जिला एवं शहर कांग्रेस अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहें। किसानों, युवाओं, बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय समस्याओं को लेकर जनसंपर्क बढ़ाने तथा संघर्ष की राजनीति को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार,वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठकों में आगामी चुनावों की रणनीति, संगठनात्मक नियुक्तियों और जनआंदोलनों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व संगठन में जवाबदेही तय करने और कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय भूमिका देने की दिशा में भी काम कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस प्रदेश में विपक्ष की भूमिका को अधिक आक्रामक बनाते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ जनमुद्दों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रही है। पार्टी का फोकस अब केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित नहीं रहकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर है।
कांग्रेस की रणनीति में युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा और अनुभव दोनों का संतुलन बना रहे।
बूथ से लेकर प्रदेश तक बनेगी नई ताकत
पार्टी की प्राथमिकताओं में बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार, जिला अध्यक्षों की जवाबदेही तय करना, किसानों और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता देना तथा आगामी चुनावों के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करना शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपनी इस रणनीति को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है तो आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में इसका असर दिखाई दे सकता है।
कांग्रेस की नई सियासी रणनीति
✔ बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार
✔ जिला और शहर अध्यक्षों की जवाबदेही
✔ किसानों, युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दों पर आंदोलन
✔ वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच समन्वय
✔ आगामी चुनावों के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा

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