Diesel-Petrol Price: पेट्रोल-डीजल हुआ सस्ता, भारत के इस पड़ोसी देश ने घटा दिए तेल के दाम, जानें नईं कीमतें
इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते तनाव की तपिश अब सीधे तौर पर आम आदमी की जेब तक पहुंचने लगी है। शुक्रवार, 16 मई को भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर जनता को महंगाई का झटका दिया है। दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत में दाम बढ़े हैं, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान ने तेल की कीमतों में 5 रुपये की कटौती कर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, इस कटौती के बाद भी पाकिस्तान में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
पाकिस्तान में 'राहत' का दिखावा, कीमतें अब भी ₹400 के पार
पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल में 5 रुपये की मामूली कटौती जरूर की है, लेकिन वहां आम आदमी के लिए ईंधन अब भी पहुंच से बाहर है। इस कटौती के बाद वहां पेट्रोल की नई कीमत 409.78 रुपये और हाई-स्पीड डीजल 409.58 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। गौरतलब है कि इस तथाकथित राहत से पहले पिछले हफ्ते ही वहां सरकार ने पेट्रोल में ₹14.92 और डीजल में ₹15 की भारी बढ़ोतरी की थी। यही नहीं, युद्ध शुरू होने के बाद वहां एक ही दिन में कीमतें ₹55 प्रति लीटर तक बढ़ाई गई थीं।
भारत में 4 साल बाद बड़ा बदलाव
भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह फेरबदल किया है। अप्रैल 2022 से कीमतें स्थिर बनी हुई थीं, हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने जनता को राहत देते हुए कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता के कारण अब ₹3 की यह बढ़ोतरी की गई है।
वैश्विक संकट के बीच भारत बना 'सुरक्षा कवच'
दुनिया भर में मचे तेल संकट के बावजूद भारत में कीमतों पर नियंत्रण अन्य विकसित और विकासशील देशों के मुकाबले कहीं बेहतर है। रिपोर्ट के मुताबिक:
- म्यांमार: यहां पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ है।
- अमेरिका, यूएई और मलेशिया: यहां ईंधन की कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक का उछाल आया है।
- भारत का प्रदर्शन: वैश्विक स्तर पर कीमतों में आग लगने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल केवल 3.2 प्रतिशत ही महंगे हुए हैं।
साफ है कि मोदी सरकार ने अपनी रणनीति से भारतीय जनता को उस वैश्विक तबाही से बचा कर रखा है, जिससे श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश बुरी तरह जूझ रहे हैं।

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