परिसीमन के बाद बदल सकता है छत्तीसगढ़ का सियासी नक्शा, विधानसभा की सीटें 90 से बढ़कर 135 होने की चर्चा : 2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तावित परिसीमन में सीटों के पुनर्गठन के संकेत, महिला आरक्षण का दायरा भी बढ़ने की संभावना

परिसीमन के बाद बदल सकता है छत्तीसगढ़ का सियासी नक्शा, विधानसभा की सीटें 90 से बढ़कर 135 होने की चर्चा : 2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तावित परिसीमन में सीटों के पुनर्गठन के संकेत, महिला आरक्षण का दायरा भी बढ़ने की संभावना

रायपुर। लोकसभा में परिसीमन से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद अब देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी बड़े बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रस्तावित परिसीमन के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा की मौजूदा 90 सीटों की संख्या बढ़कर 135 तक पहुंच सकती है। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है तो विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं, राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीतियां व्यापक रूप से बदल सकती हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर विधानसभा सीटों का पुनर्गठन किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके तहत राज्य के अलग-अलग संभागों में सीटों का संभावित बंटवारा भी सामने आया है। अनुमानित गणना के अनुसार बिलासपुर संभाग में 39, रायपुर संभाग में 30, दुर्ग संभाग में 30, सरगुजा संभाग में 20 और बस्तर संभाग में 16 सीटें हो सकती हैं। इस तरह कुल संख्या 135 तक पहुंचती है।

सीटों की संख्या बढ़ी तो बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

परिसीमन केवल विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि इसका सीधा असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। नए विधानसभा क्षेत्रों के गठन के साथ मौजूदा क्षेत्रों की सीमाएं भी बदल सकती हैं। ऐसे में कई वर्तमान विधायकों के सामने अपने पुराने राजनीतिक क्षेत्र के पुनर्गठन की चुनौती होगी।

राजनीतिक दलों के लिए भी यह बदलाव किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। जिन नेताओं ने वर्षों से किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र में अपना संगठन और जनाधार तैयार किया है, उनके सामने नए परिसीमन के बाद बदले हुए क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ बनाने की चुनौती आ सकती है।

महिला आरक्षण भी बनेगा बड़ा राजनीतिक मुद्दा

प्रस्तावित परिसीमन के साथ विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना भी चर्चा में है। वर्तमान विधानसभा में महिलाओं के लिए 19 सीटें आरक्षित हैं, जबकि प्रस्तावित व्यवस्था में यह संख्या बढ़कर लगभग 45 सीटों तक पहुंच सकती है।

यदि ऐसा होता है तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का स्वरूप काफी बदल जाएगा। राजनीतिक दलों को बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारना पड़ेगा और संगठनात्मक स्तर पर भी महिला नेतृत्व को मजबूत करना होगा।

आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों पर भी रहेगा असर

छत्तीसगढ़ जैसे भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविध राज्य में परिसीमन का प्रभाव एक समान नहीं होगा। रायपुर-दुर्ग जैसे शहरी और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों से लेकर सरगुजा और बस्तर के दूरस्थ एवं आदिवासी इलाकों तक परिसीमन के अलग-अलग राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।

विशेषज्ञों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि नए विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं किस प्रकार निर्धारित होती हैं और जनसंख्या के साथ भौगोलिक स्थिति, सामाजिक संरचना तथा दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को कितना महत्व दिया जाता है।

राजनीतिक दलों के सामने नई रणनीति की चुनौती

परिसीमन के बाद केवल उम्मीदवारों के चेहरे बदलने की संभावना नहीं होगी, बल्कि राजनीतिक दलों को बूथ स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक संगठन का नए सिरे से पुनर्गठन करना पड़ सकता है। नए मतदाता समूह, नए क्षेत्र और बदले हुए सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का केंद्र बनेंगे।

कई मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों के हिस्से दूसरे क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में वर्षों से तैयार राजनीतिक समीकरणों के टूटने और नए समीकरण बनने की संभावना है। यही वजह है कि परिसीमन की प्रक्रिया को राजनीतिक दल बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के लिए परिसीमन सिर्फ सीटों की संख्या का बदलाव नहीं

छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों का संभावित विस्तार आने वाले समय में राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 90 से 135 सीटों तक पहुंचने का अर्थ केवल 45 नई सीटों का जुड़ना नहीं है, बल्कि यह प्रतिनिधित्व, राजनीतिक नेतृत्व, महिला भागीदारी, क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी रणनीति के पूरे ढांचे को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि अंतिम तस्वीर परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया, अधिसूचना और विधानसभा क्षेत्रों के वास्तविक पुनर्गठन के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सामने आए प्रस्ताव ने राजनीतिक दलों और संभावित दावेदारों के बीच नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।