कांग्रेस के 41 जिला अध्यक्ष… पुराने-नए चेहरों के बीच इस तरह बिठाया गया जातीय और गुटीय समीकरण

कांग्रेस के 41 जिला अध्यक्ष… पुराने-नए चेहरों के बीच इस तरह बिठाया गया जातीय और गुटीय समीकरण

 छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने 41 जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी हैं। पूरी प्रक्रिया में गुटीय संतुलन, जातिगत प्रतिनिधित्व और संगठन के पुराने-नए चेहरों के बीच तालमेल को खास तरजीह दी गई। रायपुर शहर की जिम्मेदारी श्रीकुमार मेनन को मिली, जबकि सुकमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बेटे हरीश लखमा को अध्यक्ष बनाया गया। कई जिलों में विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी कमान सौंपी गई।

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रायपुर
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पार्टी ने नियुक्तियों में जातिगत प्रतिनिधित्व पर बारीक ध्यान रखा। पांच जिलों में यादव समाज के नेताओं को मौका मिला है। साहू समाज से तीन, एससी और एसटी समाज से चार-चार चेहरों को जिम्मेदारी दी गई। सामान्य वर्ग में ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया।

दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुंद और बालोद जैसे जिलों में भूपेश बघेल की पसंद पर मुहर लगी, जबकि बस्तर संभाग में दीपक बैज की पसंद को महत्व दिया गया। जांजगीर-चांपा और कोरबा में चरणदास महंत के सुझावों के आधार पर नियुक्तियां हुईं। रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र में उमेश पटेल की पसंद के चेहरे सामने आए, वहीं सरगुजा और बिलासपुर में टीएस सिंहदेव की राय हावी रही। कुछ जिलों में सबकी सहमति से नाम तय हुए। विधायक द्वारिकाधीश यादव भी अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे।

किसे मिली कहां की कमान?

  • रायपुर शहर का अध्यक्ष: श्रीकुमार शंकर मेनन
  • रायपुर ग्रामीण के अध्यक्ष: राजेंद्र पप्पू बंजारे
  • बिलासपुर: सिद्धांशु मिश्रा
  • बिलासपुर ग्रामीण के अध्यक्ष: महेंद्र गंगोत्री
  • सुकमा जिला अध्यक्ष: हरीश लखमा को
  • महासमुंद: द्वारिकाधीश यादव
  • मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी): अशोक श्रीवास्तव
  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: सुरजीत सिंह ठाकुर
  • रायगढ़ शहर: शाखा यादव
  • सूरजपुर जिला: शशि सिंह कोर्राम
  • बलरामपुर: हरिहर प्रसाद यादव
  • बस्तर ग्रामीण: प्रेम शंकर शुक्ला
  • दंतेवाड़ा: सलीम राजा उस्मानी
  • धमतरी: तारिणी चंद्राकर
  • दुर्ग शहर: धीरज बाकलीवाल
  • कोंडागांव: रवि घोष
  • राजनांदगांव: जितेंद्र उदय मुदलियार
  • कोरबा जिलाध्यक्ष: मुकेश कुमार राठौर

इन नियुक्तियों के पीछे लगभग दो महीने तक रायशुमारी की गई। कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ एनजीओ, सामाजिक संगठनों और पत्रकारों की भी राय ली गई। कांग्रेस इसे संतुलित सूची बता रही है और दावा कर रही है कि सक्षम लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।

दूसरी तरफ भाजपा इसे लेकर लगातार निशाना साध रही है। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तो पैसे लेकर पद देने का आरोप तक लगा दिया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस में व्यक्ति प्रमुख होता है, जबकि भाजपा में संगठन। इस पर कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा कांग्रेस की इस सूची से घबराई हुई है, क्योंकि पूरे प्रदेश में उसके खिलाफ माहौल बन रहा है।