कॉर्पोरेटर को चूना लगाने वाले तांत्रिक श्रीवास्तव के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में पेश किया चालान, विदेशों में सैकड़ों करोड़ के निवेश का हुआ खुलासा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्व की कांग्रेस सरकार में दिल्ली के एक कॉर्पोरेटर को ठेका दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले तथाकथित तांत्रिक कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके के खिलाफ तेलीबांधा पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। इस चालान में पुलिस ने कई अहम् खुलासे किए हैं। पुलिस का कहना है कि केके और उसके बेटे कंचन श्रीवास्तव ने हवाला के जरिए करोड़ों रुपए भेजकर चीन और ऑस्ट्रेलिया में निवेश किए हैं. दोनों के बैंक खातों की जांच में 441 करोड़ रुपए के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है।
500 करोड़ के ठेके का दिया था झांसा
नोएडा की रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह रावत ने बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव के खिलाफ FIR दर्ज कराइ थी। रावत ने अपनी शिकायत में बताया कि पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान केके श्रीवास्तव बेहद प्रभावशाली था। उसने रावत को को स्मार्ट सिटी के तहत 500 करोड़ के ठेके दिलाने का झांसा दिया और उनसे भुगतान के एवज में अलग-खातों में 15 करोड़ रुपए ले लिए। बाद में जब काम नहीं मिला और रूपये वापस नहीं मिले तब रावत ने FIR दर्ज कराइ।

कांग्रेस नेता शिंदे ने की भागने में मदद
केके और कंचन श्रीवास्तव अपने खिलाफ तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद फरार हो गए थे। पुलिस की जांच में पता चला कि युवा कांग्रेस नेता आशीष शिंदे अपनी कार CG 04PP 0007 में केके को छिपाकर नागपुर ले गया। वहां कुछ दिन रहने के बाद दोनों दिल्ली पहुंचे। लगभग एक महीने तक वहां छिपे रहने के बाद केके भोपाल आया और शिंदे रायपुर लौट गया। काफी खोजबीन के बाद पुलिस ने 24 जून को केके को भोपाल से गिरफ्तार किया।
अब्बास अली के खाते का हुआ इस्तेमाल
दरअसल अर्जुन सिंह ने ठेका मिलने की उम्मीद में 10 से 17 जुलाई 2023 के बीच कंचन और केके को 15 करोड़ रुपए भेजे। यह रकम अकाउंट R 14900500, 500000, 0026050, 10126077, 001063400 में ट्रांसफर की गई। इनमें से तीन खाते बिलासपुर के अब्बास अली के नाम पर हैं, जो केके श्रीवास्तव के लिए काम करता था। पिता-पुत्र लगातार अर्जुन से संपर्क में थे, और उन्हें वाट्सएप पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजते रहे, जिससे अर्जुन को भरोसा हो गया कि वह काम दिला देंगे। कुछ रकम लौटाने के बाद बाकी पैसा वापस नहीं किया गया। दोनों ने पैसे को निजी उपयोग में खर्च कर दिया।

FLY ASH के ट्रांसपोर्टेशन में की कमाई
कांग्रेस के शासनकाल में केके श्रीवास्तव की कंपनी को कोरबा जिले में बिजली कंपनियों की राख के परिवहन का करोड़ों का ठेका मिला था। इस दौरान कोरबा जिले में अनेक स्थानों पर मनमाने तरीके से राख का डिस्पोजल किया गया, जिसका नुकसान आज भी कोरबा के कई इलाके के लोग भुगत रहे हैं। इस काम में केके ने काफी कमाई की। इसके अलावा खुद के तांत्रिक होने और नेताओं से संबंध होने का हवाला देकर उसने कई लोगों को चूना लगाया। हालांकि इनमें से केवल रावत ही सामने आये और उन्होंने पुलिस में FIR दर्ज कराई।
ED और CBI भी करेगी जांच
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा बुक से संबंध का उल्लेख किया है, इसलिए जांच रिपोर्ट ED और CBI को भी भेजी गई है। पता चला है कि ईडी ने जांच शुरू कर दी है और सीबीआई भी जल्द पूछताछ करेगी। महादेव सट्टा मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक 120 से अधिक लोगों के बयान लिए जा चुके हैं। इस मामले में केके श्रीवास्तव का भी नाम सामने आया है।
करोड़ों की धोखाधड़ी के इस मामले में पुलिस ने प्रमुख आरोपी केके को तो गिरफ्तार कर लिया, मगर उसका बेटा कंचन और सहयोगी अब्बास अली को फरार बताया है। दोनों इस मामले में नामजद आरोपी हैं मगर पुलिस ने इन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया है। बहरहाल मामले में चालान कोर्ट में पेश हो गया और जल्द ही मामले में पेशी शुरू हो जाएगी। हालांकि मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा बुक में अभी जांच होना बाकी है। जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि केके ने ऑस्ट्रेलिया और चीन में करोड़ों रुपयों का निवेश किया है। ED और CBI की जांच में इसके बारे में और खुलासा हो सकेगा।

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