भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, जानिए क्या है इसके मायने ?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में सोमवार को एक नए युग की शुरुआत हुई। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए विदेशी धरती पर अवसरों के नए द्वार भी खोलेगा।
समझौते के मुख्य बिंदु
इस एफटीए की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी रफ्तार रही है। महज 9 महीनों के रिकॉर्ड समय में बातचीत पूरी कर इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते के तहत, भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले 100 प्रतिशत उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (टैरिफ) नहीं लगेगा। इससे पहले लगभग 450 भारतीय उत्पादों पर 10% शुल्क लगता था। इसके बदले में, भारत ने न्यूजीलैंड के 95% सामानों पर टैरिफ आर्थिक मोर्चे पर, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की ओर एक बड़ा कदम बताया है।
मुख्य आंकड़े
- निवेश प्रतिबद्धता: अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश।
- वीजा कोटा: कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा का विशेष कोटा।
- छात्रों को लाभ: पढ़ाई के दौरान 20 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की अनुमति और एक्सटेंडेड पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा।
- व्यापार लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य।
- सुरक्षित क्षेत्र: डेयरी (दूध, पनीर, दही) और कृषि उत्पादों को आयात छूट से बाहर रखा गया है।
आगे क्या होगा?
इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय आईटी (IT) और वित्तीय सेवा क्षेत्र को न्यूजीलैंड में बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्री गोयल के अनुसार, आने वाले महीनों में यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी इसी तरह के महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों पर बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सकता है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।

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