ममता को दिखाया गया पार्टी से बाहर का रास्ता,अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लंबे समय से चल रहे अंदरूनी विवाद ने आखिरकार बड़ा रूप ले लिया। पार्टी के बागी गुट ने संगठन पर पूरी तरह कब्जा जमाते हुए पार्टी की संस्थापक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही नेतृत्व से बेदखल कर दिया।
बागी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को तृणमूल कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। वहीं, पार्टी के युवा चेहरे और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है। करीब तीन दशक से राज्य की राजनीति में प्रभाव रखने वाली ममता बनर्जी के लिए यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर लंबे समय से नेतृत्व शैली, संगठनात्मक फैसलों और उत्तराधिकार की राजनीति को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था समाप्त हो गई थी और सभी निर्णय सीमित दायरे में लिए जा रहे थे।
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद अरूप रॉय ने कहा कि पार्टी को नए सिरे से संगठित किया जाएगा और सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश विधायक और जिला इकाइयां उनके साथ हैं।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक और पार्टी विरोधी करार दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की स्थापना करने वाली नेता को पार्टी से अलग नहीं किया जा सकता और इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी चुनौती दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संकट गहराता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे राज्य की सत्ता और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
क्या हैं बड़े घटनाक्रम?
▪️ बागी गुट ने टीएमसी संगठन पर दावा किया।
▪️ ममता बनर्जी को नेतृत्व से हटाने का फैसला।
▪️ अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष।
▪️ अभिषेक बनर्जी निलंबित।
▪️ पार्टी में दो धड़ों के बीच टकराव तेज।
▪️ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की संभावना।

