दोकड़ा (जशपुर)। ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में सोमवार को स्नान पूर्णिमा का पर्व अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के सुगंधित जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दिव्य महारण स्नान (महाभिषेक) संपन्न हुआ। पूरे मंदिर परिसर में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, शंखनाद, भजन-कीर्तन और घंटियों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
महाभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तों ने महाप्रभु के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए इस धार्मिक आयोजन ने दोकड़ा धाम को आस्था के महासागर में तब्दील कर दिया।
महारण स्नान के पश्चात भगवान श्री जगन्नाथ को दिव्य गजानन वेश धारण कराया गया। इसके साथ ही महाप्रभु को पारंपरिक 56 भोग अर्पित किए गए। भगवान के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। देर शाम तक भक्तों का मंदिर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
15 दिनों तक अनसर काल में रहेंगे महाप्रभु
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों के जल से महाभिषेक के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा 15 दिनों के लिए अनसर काल में प्रवेश करते हैं। मान्यता है कि अधिक स्नान के कारण महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और इस अवधि में वे विश्राम करते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते।
अनसर काल के दौरान भगवान की विशेष सेवा-पूजा, औषधीय उपचार एवं पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। इसके पश्चात महाप्रभु नवयौवन वेश में भक्तों को दर्शन देंगे और फिर भव्य रथयात्रा महोत्सव का आयोजन होगा।
कार्यक्रम के समापन पर महाआरती एवं महाप्रसाद वितरण किया गया। श्री जगन्नाथ मंदिर समिति ने स्नान पूर्णिमा महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, सेवायतों एवं आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

